थांरौ साथो घणो सुहावै सा…

9.11.12

दीयाळी रा दिवटियां ! थां’री के औकात ?

रामराम सा !
धनतेरस , रूपचौदस , दीयाळी , गोरधन पूजन , भाईबीज
री मोकळी
शुभकामनावां ! मंगळकामनावां ! 

    
लिछमी नित आशीष दै , गणपति दै वरदान !
सुरसत-किरपा सूं बधै सदा आपरौ मान!!
 
दीयाळी हरख रौ उच्छब अर आणंद रौ तिंवार है 
पण संसार में सगळा जणा बडै भाग वाळा कोनीं हुवै
ऐ दूहा निरधन अर कमजोरां री दीठ सूं कह्योड़ा है

मूंघाई छाती चढी , ऊपर काळ-कराळ !
साम्हीं दीयाळी खड़ी ; सांवरियो रिछपाळ !! 
 
फेर दियाळी आयगी , करै दीनियो सोच !
किनको हाथां मांयलो , डगमग खावै गोच !!
 
जठै टंक रौ पीसतां’ रूध्या रैवै हाथ !
उछब दियाळी रौ बठै कैड़ो लिछमीनाथ ?!
 
एक मजूर्’यां नीं ; भळै मूंघाई विकराळ !
दीयाळी नैं जोर के ? …आवै सालूं-साल !!
 
कळझळ करतां जुग हुया , गया झुळकतां साल !
दीयाळी करसी किस्यी अबकी म्हांनै न्याल ?!
 
दिन-हफ्ता रो-रो’ कटै , जाय झींखतां साल !
दीयाळ्यां-होळ्यां करै के ठनठन गोपाळ ?!
 
मूंघा पाणी-बीजळी , रोटी-दाळ जंवार !
दीयाळी ! था’री किंयां करां मान-मनवार ?!
 
टाबरियां ; बागा नुंवा , टापरियै रै रंग !
दीयाळी ! तूं आयगी भळै करण नैं तंग ?!
 
दोरा-स्सोरा काटल्यां , म्है आडा दिन नाथ !
दीयाळी तो आवतां… होवै बाथमबाथ !!
 
हाडफोड़ मूंघ्यावड़ो , गळै मांयनैं सांस !
दीयाळी थळकण खड़ी ; काळजियै भारास !!
 
हे लिछमी मा ! स्यात तूं बैवै आंख्यां मींच !
भगतू रह्’यो अडीकतो , सेठ लेयग्यो खींच !!
 
म्हैल किरोड़ी रै मंड्या दीयाळी रा ठाठ !
तीबै फाट्या चींथड़ा सतियो ; टूटी खाट !!
 
ईं घर बीं घर क्यूं धर्’या दीयाळी दो रूप ?
ठूंड भर्’यो घर एक रौ , इक  रौ घांटो टूंप !!
 
दीयाळी रा दिवटियां ! थां’री के औकात ?
धुख-धुख’ गाळां जूण म्है ,सिळग-सिळग’ दिन-रात !!
 
लिछमी गणपत सुरसती , रिध-सिध इंद्र कुबेर !
मेटो म्हारै देश सूं भूख पाप अंधेर !!
-राजेन्द्र स्वर्णकार
©copyright by : Rajendra Swarnkar
 
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10 टिप्‍पणियां:

Dr Vijay Soni ने कहा…

हार्दिक शुभकामनाएं!

Dr. shyam gupta ने कहा…

दीयाली री काम्णा थांरी के औकात ...

Dr. shyam gupta ने कहा…

दीयाली री काम्णा म्हारी के औकात ...

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…




ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
♥~*~दीपावली की मंगलकामनाएं !~*~♥
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ
सरस्वती आशीष दें , गणपति दें वरदान
लक्ष्मी बरसाएं कृपा, मिले स्नेह सम्मान

**♥**♥**♥**● राजेन्द्र स्वर्णकार● **♥**♥**♥**
ஜ●▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬●ஜ

ZEAL ने कहा…

दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें.

संतोष त्रिवेदी ने कहा…

दोहे वाकई प्रभावपूर्ण हैं !

वाणी गीत ने कहा…

दिवाळी मूंगी घणी पड़ें , फेर भी बाजार भरा पड्या
निरखता दुकाना री हलचल सोच्या मूंगायी कठे लूकी पड़ी है !!
देश से गरीबी दूर हो , सब तरफ सम्पन्नता हो ...
बहुत शुभकामनायें !

Rajput ने कहा…

हे लिछ्मी मा ! स्यात तूँ बैवे आंख्या मीच
भगत रह्यो अडिगतों, सेठ लेगो खींच
:)
लाजवाब राजेंद्र जी , जवाब नहीं आपकी कविताई का । मजा आ गया । बेहद शानदार

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार ने कहा…

#
12-12-12 के अद्भुत् संयोग के अवसर पर
लीजिए आनंद ,
कीजिए आस्वादन
वर्ष 2012 के 12वें महीने की 12वीं तारीख को
12 बज कर 12 मिनट 12 सैकंड पर
शस्वरं पर पोस्ट किए
मेरे लिखे 12 दोहों का

:)

Bhagirath Kankani ने कहा…

बहुत सुंदर प्रस्तुती। मेरे ब्लॉग http://santam sukhaya.blogspot.com पर आपका स्वागत है. अपनी प्रतिक्रिया से अवगत कराये, धन्यवाद